गान्तोक। (निससं) लंबे वक्त से विवादित दक्षिण सिक्किम यांगगांग के अप्पर यांगगांग स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय कैंपस के जमीन विवाद अब समाधान की अंतिम पड़ाव की ओर है। विश्वविद्यालय के जमीनदाताओं के द्वारा उठाई जा रही जमीन आवंटन के मसले को आज पहले चरण में 32 जमीनदाताओं को जमीन आवंटन के कागजात सौंपने के साथ ही एक तरह से हल किया गया। प्रस्तावित युनिवर्सिटी कैंपस के जमीनदाताओं को आज दक्षिण के जिलापाल प्रभाकर वर्मा, राभोंगला के महकुमा अधिकारी पीके राई ने अप्पर यांगगांग पर्यटन आवास गृह में एक कार्यक्रम के बीच जमीन के एलोटमैंट आर्डर हस्तांतरित किया। जमीनदाताओं को अप्पर यांगयांग वार्ड के सेलेमथांग में जमीन आवंटिय किया गया है। आज कूल 32 जमीनदाताओं को जमीन के एलोटमैंट आर्डर दिये गये जिनमें से 23 को आधा-आधा ऐकर, छह जमीनदाताओं को 20-20 डेसिमल जमीन और बांकी तीन जमीनदाताओं को मकान बनवाने लायक जमीन के एक-एक प्लॉट दिये गये। सभी को लॉटरी पद्वति के द्वारा जमीन मुहैया कराई गयी है, जिलापाल वर्मा ने जानकारी दी।
महकुमा अधिकारी राई ने आगे बताया कि सभी जमीनदाताओं को एक हफ्ते के भीतर जमीन के पर्चे उनके नाम कर सौंपे जायेंगे। महकुमा अधिकारी राई ने आगे बताया कि केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए अपनी जमीन देने वाले अन्य 57 जमीनदाता परिवारों को भी जल्द ही घर बनवाने के लिए एक-एक प्लॉट जमीन मुहैया कराया जायेगा। यहां यह बात बताना दीगर है कि राज्य के मुख्यमंत्री पवन चामलिङ ने अप्पर यांगगांग में ही सिक्किम विश्वविद्यालय कैंपस परिसर की आधारशिला समारोह के दौरान 18 मई को जमीनदाताओं को एक महीने के भीतर जमीन विवाद का समाधान करने की घोषणा की थी। देश के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने अपने सिक्किम भ्रमण के दौरान पिछले महीने की 16 तारिख को राजधानी गान्तोक के मनन केंद्र से यांगगांग स्थित सिक्किम केंद्रीय विश्वविद्यालय का सांकेतिक रूप में आधारशिला रखा था। राष्ट्रपति मुखर्जी मौसम की प्रतिकूलता की वजह से यांगगांग नहीं पहुंच सके थे जिसके बाद उन्होंने मनन केंद्र से ही विश्वविद्यालय का आधारशिला रखा। उसके दो दिन बाद मुख्यमंत्री पवन चामलिङ ने खुद यांगगांग पहुंचकर विश्वविद्यालय के निर्माण स्थल का आधारशिला रखा जिस के बाद उन्होंने विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रो. टीबी सुब्बा को विश्वविद्यालय परिसर निर्माण की सारी जिम्मेदारी भी सौंपी। उल्लेख्य, साल 2007 में सिक्किम केंद्रीय विश्वविद्यालय के अस्तित्व में आने के बाद इसके पहले उकुलपति प्रो. महेंद्र पी लामा के अड़ियल रवैये और राज्य सरकार के साथ उनके बिगड़ते रिश्तों की वजह से पूरे पांच सालों तक जमीन अधिग्रहण ही नही हो सका था। इसी वजह से ही कैंपस निर्माण की पूरी प्रक्रिया खटाई में पड़ गयी थी जिसे राज्य के विपक्षी दलों ने भी काफी विवादास्पद बनाकर खूब हवा दी।
देश के संविधान के द्वारा संविधान की एक अधिनियम के तहत साल 2007 में स्वीकृत की गयी सिक्किम केंद्रीय विश्वविद्यालय के पहले उपकुलपति प्रा. लामा पर जमीनदाताओं ने जबरजस्ती जमीन पर बाड़ लगाने के प्रयास करने और बाहुबल का प्रयोग करने का इल्जाम तक लगाया था। जमीनदाताओं के पक्ष में अपनी आवाज लगातार बुलंद करने वाले और इसे एक आंदोलन का रूप देकर सड़क तक उतरकर उठाने वाले वर्तमान दक्षिण जिला पंचायत अध्यक्ष सीएल गुरूंग ने जमीनदाताओं को जमीन का एलोटमैंट आर्डर मिलने का श्रेय राज्य के मुख्यमंत्री पवन चामलिङ को दिया है। उन्होंने कहा है, अप्पर यांगगांग के जमीनदाताओं ने मुख्यमंत्री चामलिङ के उपर यो विश्वास रखा था उसका मिठा फल उन्हें आज मिला है। मुख्यमंत्री चामलिङ ने इस बार भी हमेशा की तरह अपना वचन निभाया और लोगों को सही वक्त पर सही न्याय दिया, उन्होंने कहा। जमीनदाताओं को सही तौर पर न्याय मिला है जिससे हमें अपार खुशी मिली है, उन्होंने बातचीत के दौरान कहा।