गान्तोक। सिक्किमी साहित्य, कला और विचार को प्रश्रय देने के लिए विगत 19 महीने से राजधानी गान्तोक के प्रेस क्लब ऑङ्ग् सिक्किम के तत्वावधान में संचालित हो रहे मासिक साहित्य, विचार और कलाप्रधान कार्यक्रम ‘विचार कला संगम’ के 19 वें प्रकरण में गीतकार तथा कवि बसन्त कुमार चौधरी अतिथि साहित्यकार के रूप में उपस्थित थे। वरिष्ठ पत्रकार राजनीतिज्ञ सी.डी. राई की अध्यक्षता में सम्पन्न कार्यक्रम में राजधानी गान्तोक के साहित्यिक माहौल और सृजनधर्मियों के प्रति अवाक होते हुए साहित्यकार बसन्त चौधरी ने गान्तोक की तुलना काव्य से की। उन्होंने काव्य वाचन और अन्तरक्रिया कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा, मैं जब भी सिक्किम में आता हूं, मुझे ऐसा लगता है कि मैं सजे-संवरे काठमांडु में हूं। यहां जो अपनापन है उससे मुझे यह कतई नहीं लगता कि मैं नेपाल के बाहर हूं।
जहां भी जाएं अपनी प्रिय कविता ‘आमा’ का पाठ करनेवाले कवि बसन्त चौधरी ने राजधानी गान्तोक को काव्य शहर की संज्ञा देते हुए कहा, गान्तोक शहर को मैं काव्य शहर कहना चाहूंगा। गान्तोक को देखकर ऐसा लगता है मानों यह हमारी राजधानी काठमांडु का सजा-संवरा हुआ रूप है। इसीलिए यहां के जन-मन और प्रकृति के प्रति मैं नतमस्तक हो जाता हूं। सिक्किम में जो साहित्यिक आतिथ्य मिला, उसे सकरात्मक रूप में लेते हुए उन्होंने कहा, मेरा वह सपना यहां साकार हुआ है जो मैंने देखा ही नहीं था। सिक्किम में हो रही साहित्यिक गतिविधि और क्रियाकलाप के बारे में अपने विचार प्रकट करते हुए उन्होंने कहा, सिक्किम ने साहित्य के क्षेत्र में बहुत तरक्की की है। मुझे विश्वास है सिक्किम आनेवाले दिनों में नेपाली साहित्य को विश्व के मंच पर प्रतिष्ठित कर पाएगा। साहित्यकार चौधरी ने इस बार पहले की तरह रोमांटिक कविताएं पाठ करने के बजाए भावप्रधान और संवेदना से भरी हुई रचनाएं सुनाई जिनमें हिन्दी की गजल और नेपाली कविता शामिल थीं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पत्रकार सी.डी. राई ने अपने 89 साल की उम्र और अनुभव से पके हुए विचार प्रस्तुत करते हुए प्रेस क्लब के इस कार्यक्रम को सार्थक और विचार-उत्प्रेरक बताया। उन्होंने पुराने नेपाली गाने गाकर कार्यक्रम में समां बांधा। उन्होंने इसे सिक्किमी साहित्य और वैचारिक कार्यक्रम का एक उत्कृष्ट नमूना बताया। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित सिक्किम नागरिक समाज के मुख्य संयोजक तथा कलाकार, वास्तुकार किरण रसाइली ने अपने सम्बोधन में प्रेस क्लब द्वारा शुरू किए गए इस कार्यक्रम को वैचारिक आन्दोलन की संज्ञा देते हुए कहा, सिक्किमी समाज की जरूरत यह कार्यक्रम पूरा कर रहा है। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में नेपाली साहित्य परिषद् के महासचिव चक्रपाणि भट्टराई उपस्थित थे। उन्होंने भारतीय नेपालियों पर विदेशी का लांछना लगाना बर्रे के छत्ते को छेड़ने के बराबर बताया।
कार्यक्रम में कवि चक्रपाणि भट्टराई, अमर बानियां लोहोरो, सुश्री दीपा राई, मणिका दाहाल, विजय बान्तवा, श्याम प्रधान, प्रवीण खालिङ व चन्द्र दुलाल ने कविताएं पढ़ी। कार्यक्रम के आकर्षण बन चुके साहित्यकार चौधरी का संक्षिप्त परिचय श्याम प्रधान ने पेश किया। कार्यक्रम में स्वागत सम्बोधन करते हुए प्रेस क्लब के अध्यक्ष भीम राउत ने विचार कला संगम के औचित्य और इसके उद्देश्य पर प्रकाश डाला। प्रेस क्लब ऑङ्ग् सिक्किम के महासचिव जोसेङ्ग लेप्चा ने कहा, इस तरह के कार्यक्रम से सिक्किमी और नेपाल के कलाकार तथा साहित्यकारों के बीच सम्बन्ध और भी प्रगाढ़ हो रहा है। उन्होंने नेपाल के पत्रकारों और साहित्यकारों के साथ अन्तरक्रिया करने की सिक्किमी पत्रकारों व साहित्यकारों की उत्सुकता का जिक्र करते हुए कहा, निकट भविष्य में सिक्किम की एक टोली अध्ययन भ्रमण के लिए नेपाल जाने की योजना है। प्रवीण खालिङ द्वारा संचालित कार्यक्रम में साहित्यकार बसन्त चौधरी का सम्मान प्रेस क्लब की ओर से परम्परागत खदा अर्पण कर किया गया। साहित्यकार चौधरीकृत कविता संकलन ‘मेघा’ का सिक्किम लोकार्पण रविवार के दिन गान्तोक के एक होटल में किया जाएगा।